NATIONAL SYMPOSIUM ON SUSTAINABILITY AND AWARD ON SUSTAINABILITY PROMOTION AT SRI SRI UNIVERSITY
For Joesendra, this is only her second fashion week showing, following her presentation at a Fashion World on this January....
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By;Vineet Tiwari वह तो राम से भी कह सकते हैं, कहां मिलेंगी अब सीता, पता नही कहां हैं, जीवित भी हैं या नही l वह तो राम से भी ऐसा कह ही सकते हैं और संभव है कहा भी होगा l कहा होगा अब नाहक परेशान नही हो, और यदि राम उनकी बात मान लेते, सीता को दुबारा प्राप्त कर पाऐंगे यह व्यवहारिक बात नही ऐसा सोच लेते, तब कुछ दिन शोक, सांत्वना के बाद लोग उनसे बुद्धिमान होने को कहते, कहते तुम तो राजा के बेटे हो दूसरा विवाह हो जाएगा, और वह भी एक से बढ़कर एक l पर वो राम हैं वह नही ढिगे, वह ढिग सकते भी नही l यह सब यानि जीवन का जोड़-धटा, व्यावहारिक-अव्यवहारिक, सही-गलत यह सब राम के भीतर चलता ही नही, तो वह सीता की ओर बढ़ते अपने कदम के अतिरिक्त, उनके भीतर दूसरा रास्ता दुविधा के रूप में है ही नही l वह राम हैं, प्रत्येक परिस्थिति में सौम्य हैं, क्योंकि क्षण जीवी हैं, क्षण-क्षण जीते हैं, आगे-पीछे की कहानी की सूची बनाकर नही जीते हैं, इस क्षण में क्या करना है, यह उनके भीतर स्वयम आता है l जीवन का नफा-नुकसान उनके आगे प्रकट होता ही नही क्योंकि उनके भीतर क्षण-क्षण जीने के कारण काई खिचाव या विकल्प के लिए स्थान नही बन पाता है l यह क्षण-क्षण उन्हे सौम्य, महाप्रेमी और हर क्षण के लिए समर्पित बनाता है l शेष वीरता घैर्य रास्ते के साथी भी उनके इन्ही तत्वों से निर्मित हैं l तो वह राम हैं और ऐसे ही जीवन का तो सुख है, अन्यथा तो आगे-पीछे-सोच कुछ तयकर कुछ हार जीत, खीझ बस घूमता रह, यह कोई जीवन है, चक्कर काटता रह, यह कोई जीवन है, जो कोई कह दे यह कर यह व्यवहारिक है, तू कहां अपनी धुन में है, यह सुनकर अपनी धुन का आनंद छोड़कर उसके जैसा हो जा, यह कोई जीवन है l जीवन तो राम का है, न कोई नफा है और न ही नुकसान बस आनंद है l एक कृष्ण हैं, हे प्रेमियों सीख लो इनसे की प्रेम कहते किसे हैं l इसे की सदैव प्रेम से भरे रहो, जो तुम्हे जो मानता है, उसके वही हो जाओ, तुम्हारे लिए तो वह प्रेमी है, किसी भी रिश्ते में, नाते में l हे प्रेमियों सीख लो कृष्ण से कि प्रेम से लबालब रहने में कितना आनंद, कितना मोह-हीनता, कितनी वीरता, कितना धैर्य प्रकट होता है l अब कोई यदि राम और कृष्ण से सीखकर अपनी आदते बदल रहा है, तो वह यह भी समझ ले, बस कपड़े बदल रहा है, भीतर कुछ नही हो रहा, बस यह नैतिकता की चीख जैसा है l बिना धर्म को महसूस किए-करे, यह नैतिकता की सूखी नंगी चीख के अतिरिक्त कुछ नही साबित होगा, बेहद अवैज्ञानिक होगा यह l तो फिर क्या करें, कैसे हो जाएं राम, कैसे जिए कृष्ण को ? वही, प्रेम से, ध्यान से, अपने उर्जा स्थानो को जगाओ, भूख प्यास, काम मोह, वीरता, प्रेम, स्पश्टता, दिव्यता, प्रभुता की साधना करो, उर्जाओं को निर्बाध बहने का अवसर दो, तब कहीं जाकर वह क्षण आएगा जब भीतर राम आऐंगे कृष्ण आऐंगे.
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